।। श्री कलंकी वैजनाथ भगवान ।।

।। श्री पूर्ण परब्रह्म कलंकी अवतार ईश्वर वैजनाथ भगवान ।।

।। श्री पूर्ण परब्रह्म ।।
।। कलंकी अवतार ईश्वर वैजनाथ भगवान ।।

अनाथा दीना कारणे जन्मताहे । कलंकी पुढे देव होणार आहे ।
जया वर्णिता शिणली वेद
वाणी । नुपेक्षी कदा देव भक्ताभिमानी ।।
– संत रामदास स्वामी मनाचे श्र्लोक – १२५ ।।

भारत देश साधू, संतों, महंतों, साध्वी आदि की एक पवित्र भूमि है। इस पावन भूमी मे अनेक रत्नो का जन्म हुआ। तद्वत महाराष्ट्र के इस पावन भूमी मे, नगर जिले के संगमनेर गाँव में श्री पूर्ण परब्रह्म कलंकी अवतार ईश्वर वैजनाथ भगवान का जन्म श्रावण शु. ।। १ ।। सन १९१६ में हुआ। श्री कलंकी वैजनाथ भगवान के पिता श्री लक्ष्मण सखाराम वर्धेकर भोसले यह अत्रिऋषि और माँ अंबा यह अनुसूया महासती थे ऐसा कलंकी वैजनाथ भगवान के ग्रंथो मे उल्लेख है। उनके चाचा पिछले जन्म में संत सावता माली और चाची संत जनाबाई की भूमिका में थे। श्री कलंकी वैजनाथ भगवान का बचपन नासिक-पंचवटी मे गुजरा। अक्षर पहचान इतनी ही उनकी ४ थी कक्षा तक शिक्षा हुई। सन १९३५ मे एक दिन श्री कलंकी वैजनाथ भगवान जब नासिक-पंचवटी मे काला राम मंदिर मे प्रदक्षिणा कर रहे थे तब शिर्डी के साईंबाबा अचानक प्रकट हुए और कलंकी भगवान को भेट दी। उन्होने कलंकी भगवान को पुणे प्रस्थान करे ऐसा श्री दत्त भगवान का संदेश उन तक पहुचाया। तदनुसार, श्री कलंकी भगवान पुणे में गाडीखाना क्षेत्र मे रहने गए। वहा दत्त भगवान आए और २१ दिनों तक श्री कलंकी वैजनाथ भगवान के साथ रहकर सन १९३६ के दशहरा के दिन उन्हे अनुग्रह दिया और आपकी सिध्द (परिपूर्ण) हस्तलिपि से छह शास्त्रों का सार, चार वेदों को प्रकट किया जाएगा, विश्व धर्म की स्थापना होगी और “चिरंजीवी हो!” ऐसा आशीर्वाद दिया और उन्हे पूरे महाराष्ट्र में पदयात्रा करने के लिए कहा।
तदनुसार, श्री कलंकी वैजनाथ भगवान ने महाराष्ट्र में यात्रा की। उसमे पंढरपुर, गाणगापुर, तुळजापूर, अक्कलकोट, कोल्हापुर, मांढरदेवी, वाई, सतारा और सञ्जनगड जैसी कुछ खास जगहे थी। वाई, सतारा मे उनका काफी दिनो तक निवास था। इसी दौरान यही रहते हुए उन्हे मच्छिंद्रनाथ, गोरक्षनाथ, रेवणनाथ आदि नाथो की भेट हुई। कुछ स्थानों पर कलंकी भगवान को दुष्ट, अज्ञानी, षडयंत्री लोगों द्वारा काफी सताया गया है। यहां तक ​​ की उनपर ७-८ बार विष प्रयोग भी हुआ ऐसा श्री कलंकी वैजनाथ भगवान बताते थे। उस दौरान कई भक्तों ने उनके चमत्कार और साक्षात्कार के अनुभव किए। यहां वाई में रहने के दौरान, उनकी माँ का स्वर्गवास हो गया। अभी इस घटना को होके १० दिन भी पुरे नही हुए थे की उनके पिताजी का भी स्वर्गवास हुआ। उस समय, कलंकी वैजनाथ भगवान ने सभी भक्तों की बिनती मानकर उनके पिताजी को जीवित कर उनकी मृत्यू को माँ के तेरहवे तक आगे टाल दिया था। आगे चलकर श्री कलंकी वैजनाथ भगवान की भावसमाधी लगनी शुरु हो गई और उनके द्वारा “दत्तात्रय कहे” ऐसी अभंगवाणी निकलती।
वर्ष १९५० में, वे संगमनेर में लौट आए। वहा आसपास के गाँव वडगाँव लांडगा, पिंपळगांव निपाणी, राजापूर मळा, वेल्हाळे, बाळेश्वर पोखरी, समनापुर मळा आदि में उनका रहना हुआ। यहां उन्होंने आत्मबोधामृत, स्वानंदलहरी, गुरुमार्गदर्शन गीता, प्रेमरहस्य तरंग, परमस्थिती गीता आदि ग्रंथो की रचना की। लाखों अभंगावली पदों, दोहरे आदि की रचना की। वडगाँव लांडगा में रहते हुए उन्होंने विश्व धर्म की स्थापना की और ज्ञानेश्वर भगवान के भागवत धर्म के कार्य को आगे जारी रखा। कई अंधविश्वासों को हल किया। स्त्री-पुरुष यही मनुष्य की दो मुख्य जातियां हैं और अन्य सभी मानव निर्मित हैं। व्यवहार(आचार) शुद्ध बनने का मार्ग यही सच्चा मानवता धर्म है ऐसी शिक्षा उन्होंने भक्तों को प्रदान की और अनुग्रह प्रदान कर उन्हे आध्यात्मिक उपदेश किया।
सन १९६९ मे संगमनेर मे नगर रोड पर ज्ञानमाता स्कूल के सामने श्री कलंकी वैजनाथ भगवान के आश्रम का निर्माण किया गया। तब से उनका निवास वहा जुलाई, १९८७ मे महासमाधी तक था। अब इस जगह पर उनका समाधी मंदिर है। कलंकी वैजनाथ भगवान के जन्म शताब्दी अवसर पर सभी भक्तों ने जयपुर से कलंकी वैजनाथ भगवान की एक बड़ी मूर्ति बनवाई और २२ अप्रैल २०१६ को उसकी स्थापना(प्राणप्रतिष्ठा) की। मंदिर परिसर मे सभा मंडप और ध्यान मंदिर भी है। अहमदनगर में धर्मदाय आयुक्त के कार्यालय में, श्री कलंकी देव संस्थान, संगमनेर रजि. नं.ई. ८६१ संस्था रजिस्टर की गई है। मंदिर मे साल भर में लगभग ७-८ बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। हर वर्ष श्रावण शु. ।। १ ।। को श्री कलंकी वैजनाथ भगवान के जन्म अवसर पर(जयंती पर) वडगाव लांडगा स्थित श्री संत बेबीनाथ माया(माताजी- श्री कलंकी वैजनाथ भगवान की शिष्य) के आश्रम से पैदल दिंडी(पालखी) निकलती है। वडगांव लांडगा मे श्री संत बेबीनाथ माया (माताजी) का आश्रम, दत्त मंदिर और ध्यान मंदिर है। उन्होंने श्री कलंकी वैजनाथ भगवान का कार्य आगे जारी रखा है। माताजी ने भी अंतःस्फूर्तीसे अनेक आध्यात्मिक ग्रंथो की रचना की है और आज भी उनकी अभंगवाणी जारी है।
कई भक्त श्री कलंकी वैजनाथ भगवान के समाधी दर्शन को आते है और उनके द्वारा लिखे हुए ग्रंथो से ज्ञान लाभ लेते है। साथ-साथ श्री संत बेबीनाथ माया(माताजी) के दर्शन करके और उनके ज्ञान भंडार का लाभ लेकरं भी कृतार्थ हो जाते है। हम सब इन महान विभूतियों के कार्य को तन-मन-धन रुप से सहयोग करके अपने जीवन को कृतार्थ करने के लिए विनम्र अनुरोध करते हैं!

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सभी भक्तो से निवेदन है, इस वर्ष श्री. कलंकी देव जन्मोत्सव, सालाना पालखी उत्सव दिनांक २५ – जुलै – २0२५, शुक्रवार के दिन आयोजित किया गया है।

अगला कार्यक्रम

श्री दत्त जयंती
0४-१२-२0२५, गुरुवार
शाम : ६:00 – १0:00
कलंकी देव समाधी मंदिर – संगमनेर