।। श्री पूर्ण परब्रह्म ।।
।। कलंकी अवतार ईश्वर वैजनाथ भगवान अल्प परिचय ।।
विश्वव्यापी भाइयों और बहनों! हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है की, साधु-संतों की रक्षा करने, असुर प्रवृत्ती की दुष्ट मनोवृत्ती को नष्ट करने, धर्म की रक्षा करने, सत् प्रवृत्ती का उगम करने के लिए भगवान ने अलग-अलग युगो मे कच्छ, मच्छ, राम कृष्ण आदि अवतार लिए। इस घोर कलीयुग मे भगवान श्रावण शुध्द १ प्रतिपदा, सोमवार सूर्योदय के समय सन १९१६ मे महाराष्ट्र के नगर जिले के संगमनेर शहर मे, साळीवाडा क्षेत्र मे गणपतसिंह सरदारसिंह परदेशी इनके घर महासती अत्री अनुसया के गर्भ से अयोनी संभव रूप मे परम पुजनीय, पूर्ण परब्रह्म कलंकी अवतार वैजनाथ नाम से धरतीपर सगुण रूप मे साकार हुए। परम पूजनीय कलंकी भगवान का बचपन पंचवटी नासिक मे गुजरा। बाद में सन १९३१ में वे पुणे में रहे। लंबे समय तक कलंकी भगवान देहभान स्थिति में नहीं थे। बाद में सन १९३६ में, त्रैलोक्याधिपती ब्रह्मवेत्ते त्रैमुर्ती दत्त भगवान ने पुणे मे शुक्रवार पेठ गाडीखाना में मनुष्य रूप में आकर दशहरे के दिन अनुग्रह देकर “चिरंजीवी हो!” ऐसा उन्हे आशीर्वाद दिया। बाद मे बुजुर्ग माता, पिता और चाचा, चाची के साथ कलंकी वैजनाथ भगवान तीर्थ यात्रा पर निकल पडे। वाई, सातारा और महाराष्ट्र मे कई अन्य जगहो पर घुमकर सन १९४९ मे कलंकी वैजनाथ भगवान संगमनेर लौट आए।
श्री कलंकी वैजनाथ भगवान की बाह्मी स्थिति मे उनके हस्थलिपी से कई अद्वितीय और अमूल्य ग्रंथो का निर्माण हुआ। इसमें सत्रह अठारह छोटे-मोटे ग्रंथ, लाखों अभंग, छंद, दोहरे, श्लोक आदि सभी प्रकार का सामाजिक, आध्यात्मिक, भक्तिपर, वर्तमान स्थितियों पर आधारित ऐसा हस्तलिखित ज्ञान भांडार है। भक्तजन श्री कलंकी वैजनाथ भगवान द्वारा निर्मित इस अलौकिक, अध्यात्मिक ज्ञानभंडार का लाभ उठाते हैं। सभी ने इस दिव्य ज्ञानभंडार का लाभ उठाकर अपना जीवन कृतार्थ कर लेना चाहिए और साथ ही अवतार कार्य का बोध भी जानना चाहिए।
सन १९६३ में, श्री कलंकी वैजनाथ भगवान की कुंडलिनी जागृत हुई और १९६४ मे उसकी पूर्णता हुई। बौद्ध अवतार ज्ञानेश्वर भगवान ने उस समय के संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राकृत भाषा मे निर्माण करके भागवत धर्म की स्थापना की। और सभी संतों से कहा की उनका भागवत धर्म कार्य आगे वे कलंकी वैजनाथ रूप से जारी रखेंगे। विश्व धर्म की स्थापना होगी और धर्म की जड़ समानता, स्वतंत्रता, भाईचारा निर्माण होकर करुणा में वृद्धि होगी। आज तक भगवान के नौ अवतार हुए हैं। श्री पूर्ण परब्रह्म कलंकी अवतार ईश्वर वैजनाथ भगवान यह दसवां अवतार है। उनका महानिर्वाण आषाढ़ शु. ।। १० ।। सोमवार, ६ जुलाई १९८७ को संगमनेर मे हुआ।
श्री कलंकी वैजनाथ भगवान की शिष्या श्री संत बेबीनाथ माया ने श्री कलंकी वैजनाथ भगवान के कार्य को आगे जारी रखा है। वडगाँव लांडगा मे श्री संत बेबीनाथ माया (माताजी) का आश्रम, दत्त मंदिर और ध्यान मंदिर है। माताजीने भी अनेक आध्यात्मिक ग्रंथों की रचना की है और उनके द्वारा अभंगवाणी आज भी जारी है। कई भक्त आज भी श्री कलंकी वैजनाथ भगवान के समाधि के दर्शन करने आते है और उनके द्वारा लिखे अध्यात्मिक ग्रंथो के ज्ञान का लाभ उठाते हैं। साथ ही श्री संत बेबीनाथ माया के दर्शन और ज्ञानभंडार का लाभ लेकर कृतार्थ हो जाते है।
सूचना: कलंकी वैजनाथ भगवान के साक्षात्कार, घटनाए वायुरूप स्थिती से जारी रहेगी। साथ मे गोरक्षनाथ भगवान, बजरंगबली और दत्त भगवान भी रहेंगे। भक्तों को उनके दृष्टांत और साक्षात्कार होते रहते है।

